वर्णमाला और वर्णक्रम : एक भाषावैज्ञानिक एवं व्यावहारिक विश्लेषण
Updated: Aug 31
भाषा ध्वनि प्रतीकों की एक व्यवस्थित प्रणाली है, जिसके माध्यम से मनुष्य अपने विचारों, भावों और अनुभवों को व्यक्त करता है। भाषा की मौखिक अभिव्यक्ति ध्वनियों पर आधारित होती है, जबकि लिखित अभिव्यक्ति के लिए इन ध्वनियों को निश्चित प्रतीकों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इन्हीं प्रतीकों को वर्ण कहा जाता है।
किसी भी भाषा की वैज्ञानिक संरचना को समझने के लिए केवल वर्णों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह जानना भी आवश्यक है कि इन वर्णों का क्रम निर्धारण किस प्रकार किया जाता है। यही क्रमव्यवस्था वर्णक्रम कहलाती है।

आधार | वर्णमाला | वर्णक्रम |
मूल अर्थ | किसी भाषा में प्रयुक्त सभी वर्णों (स्वर, व्यंजन आदि) का मानक एवं व्यवस्थित समूह। | वर्णों को एक निश्चित नियम के अनुसार क्रम में लगाने की व्यवस्था। |
अवधारणा | यह वर्णों का समूह (Set/Collection) है। | यह वर्णों के क्रम निर्धारण का नियम है।
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मुख्य उद्देश्य | भाषा की ध्वनियों को लिखित रूप देने के लिए आधार प्रदान करना। | शब्दों, नामों या सूचनाओं को खोजने और व्यवस्थित करने योग्य बनाना।
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स्वरूप | स्थिर होता है; किसी भाषा की स्वीकृत वर्ण-सूची को दर्शाता है। | संदर्भ और नियमों के अनुसार बदल सकता है। |
उदाहरण | अ, आ, इ, ई, उ, ऊ... क, ख, ग, घ... आदि हिंदी के वर्ण। | क्रम में लगाना—अजय, अनिल, अमर; या शब्दकोश में कमल, कानून, किरण आदि का क्रम। |
प्रयोग क्षेत्र | भाषा-शिक्षण, लेखन, उच्चारण, व्याकरण। | शब्दकोश, अनुक्रमणिका, सूची, पुस्तकालय व्यवस्था, कंप्यूटर सॉर्टिंग। |
1. वर्णमाला (Alphabet)
वर्णमाला शब्द का अर्थ है—वर्णों की माला अर्थात वर्णों का क्रमबद्ध समूह।
किसी भाषा की ध्वनियों को लिखित रूप में व्यक्त करने वाले मानक वर्णों का व्यवस्थित समूह वर्णमाला कहलाता है। हिंदी वर्णमाला में मुख्यतः स्वर और व्यंजन सम्मिलित होते हैं। इनके अतिरिक्त अनुस्वार, अनुनासिक, विसर्ग तथा संयुक्ताक्षरों का भी हिंदी लेखन एवं वर्णक्रम व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है।
उदाहरण:
स्वर:
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ
व्यंजन:
क, ख, ग, घ, ङ
च, छ, ज, झ, ञ
ट, ठ, ड, ढ, ण आदि।
यह भाषा की मूल संरचना (Basic Structure) है।
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2. वर्णक्रम (Alphabetical Order)
वर्णक्रम का अर्थ है—वर्णों के आधार पर किसी वस्तु, शब्द या नाम को निश्चित क्रम में व्यवस्थित करना।
जब शब्दों को वर्णमाला के नियमों के अनुसार पहले और बाद के क्रम में रखा जाता है, तो उसे वर्णक्रम कहते हैं।
3. हिंदी वर्णक्रम योजना : एक वैज्ञानिक एवं कोशीय दृष्टिकोण
हिंदी में वर्णक्रम निर्धारण केवल वर्णमाला के पारंपरिक क्रम पर आधारित नहीं है, बल्कि इसमें वर्णों की ध्वनि-संरचना, मात्रा, अनुनासिकता, अनुस्वार, विसर्ग, हलंत, संयुक्ताक्षर तथा वर्ण-घटक का भी ध्यान रखा जाता है।
स्वर क्रम : अँ अं अ: / अ आँ आं आ ऑ इं इ ईं ई उँ उं उ ऊँ ऊं ऊ ऋं ऋ एँ एं ए ऐं ऐ ओं ओ औं औ।
व्यंजन क्रम : क क्ष ख / ख़ ग/ ग़ घ
च छ ज / ज़ ज्ञ झ
ट ठ ड / ड़ ढ / ढ़ ण
त त्र थ द ध न
प फ / फ़ ब भ म
य र ल व
श श्र ष स ह
उदाहरण :
1) कँ कं कः / क काँ कां का कॉ किं कि कीं की कुँ कुं कु कूँ कूं कू कृं कृ कें के कैं कै कों को कौं कौ।
2) कँकड़ीला, कंकण, कंकत, कंकाल, कंगन, कंगूरा, कंचुकी, कंठ, कंठ्य, कक्षा, कलाकार, कवक (फंगस), काँच, कांत(सुंदर), कालानुक्रम, कॉलेज, किताब, कीट, कुंचन, कुंडल, कुत्ता, कूंज, कूदना, कृंतक, कृपा, केंद्र, केला, कैंची, कैद, कोंपल, कोटि, कोड़ा, कौंध, कौतुक, कौशल, कौषेय, कौस्तुभ, क्यारी, क्यों, क्रंदन, क्रम, क्रांति, क्रिया, क्रीड़ा, क्रुद्ध, क्रूर, क्रेता, क्रोध, क्रौंच, क्लांति, क्लिष्ट, क्वण, क्वांरा, क्षण, क्षत्रिय, क्षमा, क्षय, क्षरण, क्षितिज, क्षीण, क्षुद्र, क्षेत्र, क्षैतिज, क्षोभ, क्षौर।
यहाँ शब्दों का क्रम केवल आरंभिक वर्ण के आधार पर नहीं, बल्कि अनुनासिकता, मात्रा, पूर्ण/अपूर्ण अक्षर और संयुक्ताक्षर के नियमों के आधार पर निर्धारित किया गया है।
सामान्य नियम :
1) कोश के वर्णक्रम में पूर्ण अक्षर से पहले अनुनासिक व अनुस्वार चिह्न अँ अं युक्त वर्ण आएगा, जैसे हँस, हंस, हस, हास, ह्रास।
2) आधे अक्षर (हलंतयुक्त व्यंजन) पूर्ण अक्षर के बाद क्रम में आते हैं।
उदाहरण—कर, कर्कट,कौन, क्या आदि में संयुक्त या आधे अक्षर का स्थान उनके मूल घटक वर्णों के अनुसार निर्धारित होगा।
3) संयुक्ताक्षरों का वर्णक्रम उनके मूल घटक वर्णों के आधार पर निर्धारित होता है। संयुक्ताक्षर स्वतंत्र वर्ण नहीं माने जाते। उनका वर्णक्रम उनके निर्माणकारी मूल वर्णों के आधार पर निर्धारित होता है।
उदाहरण :
क्ष= क्+ष (क वर्ग)
त्र= त्+र (त वर्ग)
ज्ञ= ज्+ञ (ज वर्ग)
श्र= श्+र (श वर्ग)
क्र= क्+र (क वर्ग)
कर्म= क+र्+म, (क वर्ग)
द्व= द्+व (द वर्ग)
सरल अंतर
वर्णमाला = कौन-कौन से वर्ण हैं?
वर्णक्रम = वे वर्ण किस क्रम में आएँगे?
अर्थात—
वर्णमाला भाषा के वर्णों की सूची है, जबकि वर्णक्रम उन वर्णों को व्यवस्थित करने की पद्धति है।
भाषावैज्ञानिक दृष्टि से:
वर्णमाला (Alphabet) → Inventory of Characters (वर्ण-संग्रह)
वर्णक्रम (Alphabetical Order) → Ordering of Characters (वर्ण-व्यवस्था)
इसलिए दोनों संबंधित होते हुए भी अलग अवधारणाएँ हैं। वर्णमाला के बिना वर्णक्रम संभव नहीं है, क्योंकि क्रम निर्धारित करने के लिए पहले वर्णों का ज्ञान आवश्यक है।
लेख की विशेषता
प्रस्तुत लेख में वर्णमाला और वर्णक्रम के पारंपरिक अंतर के साथ-साथ हिंदी के कोशीय वर्णक्रम की वैज्ञानिक योजना प्रस्तुत की गई है। अनुनासिकता, अनुस्वार, मात्रा, हलंत एवं संयुक्ताक्षरों के आधार पर वर्णक्रम निर्धारण की यह दृष्टि हिंदी शब्दकोश निर्माण, अनुवाद, राजभाषा कार्य और डिजिटल भाषा संसाधन के लिए उपयोगी हो सकती है।
निष्कर्ष
वर्णमाला और वर्णक्रम भाषा की दो परस्पर संबंधित किंतु स्वतंत्र अवधारणाएँ हैं। वर्णमाला भाषा के वर्णों का आधारभूत संग्रह है, जबकि वर्णक्रम उन्हीं वर्णों के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक विन्यास की प्रणाली है। हिंदी जैसी वैज्ञानिक भाषा में वर्णक्रम का निर्धारण केवल परंपरा पर नहीं, बल्कि वर्णों की ध्वन्यात्मक संरचना, मात्रा, अनुनासिकता, संयुक्ताक्षर और वर्ण-घटक के नियमों पर आधारित है।
अतः कहा जा सकता है कि — “वर्णमाला भाषा का स्वरूप है और वर्णक्रम भाषा की व्यवस्थित खोज एवं प्रयोग की वैज्ञानिक पद्धति है”।
संदर्भ सूची
1. हिंदी व्याकरण एवं भाषा-विज्ञान संबंधी मानक ग्रंथ।
2. केंद्रीय हिंदी निदेशालय, भारत सरकार द्वारा प्रकाशित हिंदी वर्तनी संबंधी सामग्री।
3. हिंदी शब्दकोश एवं कोश-विज्ञान संबंधी अध्ययन सामग्री।
4. राजभाषा हिंदी प्रशिक्षण सामग्री, भारत सरकार।
रेखा शर्मा
सेवानिवृत्त सहायक निदेशक, केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय


अद्भुत एवं ज्ञानवर्धक लेख। धन्यवाद
वर्णमाला एवं वर्णक्रम के बीच की बारीक भिन्नता को अपने बहुत ही सहज एवं सरल शब्दों में स्पष्ट करते हुए उनके उपयोगिता को भी बहुत अच्छे से समझाया है। महोदया आपका बहुत-बहुत आभार।